धरती, माँ और संस्कार
ये कविता तो सीधे दिल में उतरने वाली है ❤️🌿 इसमें माँ की ममता, धरती का आशीर्वाद और पेड़ों की आत्मा सब समा गए हैं।
पर्यावरण और धरती माँ
रोहित थपलियाल
8/15/2025
🌿 धरती, माँ और संस्कार 🌿
जिसने बीज बोया, मिट्टी से प्रेम किया,
धूप में तपकर वृक्षों को नेह दिया।
उसने न केवल छाया दी राहों को,
बल्कि जीवन दिया साँसों की चाहों को।
गली में जो बेलें लहराईं,
हर कोने में हरियाली सजाईं।
उसने प्रभु की कृपा को पाया,
पुण्य का अमृत हर पत्ते में समाया।
ना कोई मंत्र, ना कोई यज्ञ भारी,
बस एक पौधा, और सेवा सारी।
धरती मुस्काई, आकाश ने गाया,
"जिसने पेड़ लगाया,
उसने स्वर्ग पाया।"
ये बेलें, ये पेड़,
सिर्फ जड़ें नहीं —
ये उस ‘संस्कार’ की शाखाएँ हैं
जो माँ-बाप ने बोए
, हर पत्ती में उनकी ममता की छाँव
धरती की गोद, नीम की छाँव,
माँ की दुआओं में मिले
सुख-स्वप्न का गाँव।
जहाँ हर पौधा एक आशीर्वाद है,
और हर छाया में माँ का प्यार आबाद है।
जो हरियाली बोता है चुपचाप,
वो बनता है धरती का सच्चा संत,
जिसके कर्मों से प्रकृति करती है वंदन।
रोहित थपलियाल

© 2025. All rights reserved.
"DeshDharti360 की सच्ची कहानियाँ और अपडेट सीधे पाने के लिए अपना ईमेल दें प्रकृति से जुड़ें, पहले जानें।" 🌿
गौमाता और पर्यावरण की सच्ची आवाज़
यदि आपको यह लेख पसंद आया तो
DESHDHARTI360.COM पर टिप्पणियों, सुझावों, नैतिक वास्तविक कहानियों के प्रकाशन के लिए हमारे फेसबुक पेज चित्रावली पर जाएं - देशधरती360 की कला
https://www.facebook.com/DeshDhart360/
या हमारे फेसबुक ग्रुप में जाये
https://www.facebook.com/groups/4280162685549528/
आपके सहयोग से हम अपने उदेश्य व कार्यों को विस्तार दे पाएंगे




