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भाग–4 गलत निर्णय या गलत समय? — आत्मदोष से आगे की सोच
क्या हर कर्ज गलत निर्णय का परिणाम होता है? यह लेख बताता है कि कैसे बदला हुआ समय सही फैसलों को भी बोझ बना देता है।
आत्मचिंतनकर्ज: अपराध नहीं, चेतावनी है
रोहित थपलियाल
1/28/2026
पहला सवाल जो कर्ज के साथ आता है
कर्ज आते ही
मन में सबसे पहला सवाल उठता है—
“कहाँ गलती हो गई?”
यह सवाल स्वाभाविक है।
लेकिन समस्या तब शुरू होती है
जब यह सवाल
खुद को सज़ा देने में बदल जाता है।
मन धीरे-धीरे कहने लगता है—
मैंने गलत फैसला लिया
मुझमें समझ की कमी थी
मैं ज़िम्मेदार नहीं था
यह आत्म-दोष
कर्ज से भी ज़्यादा
भारी हो जाता है।
यह भाग
इसी आत्म-दोष को
समझने और
उससे बाहर निकलने की कोशिश है।
निर्णय हमेशा अकेले नहीं होते
हम अक्सर
अपने फैसलों को
अकेले खड़ा कर देते हैं।
लेकिन सच यह है—
कोई भी निर्णय
खाली जगह में नहीं लिया जाता।
हर निर्णय के पीछे होते हैं:
उस समय की आर्थिक स्थिति
स्वास्थ्य
पारिवारिक दबाव
सामाजिक अपेक्षाएँ
और भविष्य की सीमित जानकारी
आज पीछे मुड़कर
जो निर्णय गलत दिखता है,
वह उस समय
सबसे बेहतर विकल्प हो सकता था।
यह समझ
आत्म-दोष को
पहली दरार देती है।
समय की भूमिका: जिसे हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं
निर्णय का मूल्यांकन
अक्सर बिना समय को देखे किया जाता है।
लेकिन समय
सबसे बड़ा कारक होता है।
उदाहरण के लिए:
स्थिर नौकरी में लिया गया लोन
स्वस्थ शरीर में किया गया निवेश
सामान्य परिस्थितियों में उठाया गया जोखिम
जब समय बदलता है—
नौकरी चली जाती है
बीमारी आ जाती है
बाज़ार गिर जाता है
तो वही निर्णय
गलत दिखने लगता है।
यहाँ सवाल यह नहीं कि—
निर्णय गलत था या सही।
सवाल यह है—
क्या समय वैसा ही रहा?
उदाहरण : अजय (उम्र 41) — सही निर्णय, गलत दौर
अजय ने
2018 में
घर खरीदा।
नियमित नौकरी,
अच्छी सैलरी,
परिवार का सहयोग।
2020 आया।
महामारी आई।
नौकरी गई।
आज पीछे देखकर
अजय खुद से कहता है—
“काश घर न लिया होता।”
लेकिन सच्चाई यह है—
2018 में
घर लेना
एक समझदार निर्णय था।
गलती निर्णय में नहीं,
दौर में थी।
यह फर्क समझना
आत्म-दोष से
मुक्ति की शुरुआत है।
पीछे से सब साफ दिखता है
घटना हो जाने के बाद
हम सोचते हैं—
“मुझे पहले ही समझ जाना चाहिए था।”
लेकिन उस समय:
जानकारी अधूरी होती है
भविष्य अस्पष्ट होता है
जोखिम अनुमान पर आधारित होता है
पीछे से देखना
आसान है।
आगे देखकर
जीना कठिन।
कर्ज के साथ
यह पूर्वाग्रह
आत्म-दोष को
और मज़बूत कर देता है।
उदाहरण : कविता (उम्र 38) — निवेश या ज़रूरत?
कविता ने
अपने छोटे व्यवसाय को बढ़ाने के लिए
लोन लिया।
शुरुआत अच्छी रही।
फिर बाज़ार गिरा।
ग्राहक कम हो गए।
आज वह सोचती हैं—
“मैंने लालच किया।”
लेकिन सच यह है—
व्यवसाय बढ़ाना
लालच नहीं,
आवश्यकता थी।
समस्या निर्णय में नहीं,
बाज़ार की परिस्थिति में थी।
आत्म-दोष क्यों खतरनाक है
आत्म-दोष:
आत्मसम्मान को तोड़ता है
निर्णय लेने की क्षमता घटाता है
व्यक्ति को स्थिर कर देता है
जब आदमी खुद को
लगातार दोष देता है,
तो वह नए निर्णय लेने से डरने लगता है।
और डर से लिया गया निर्णय
फिर से
गलत साबित हो सकता है।
यानी
आत्म-दोष
एक दुष्चक्र बन जाता है।
निर्णय बनाम नीयत
यह फर्क समझना बहुत ज़रूरी है।
अगर नीयत:
ईमानदार थी
ज़िम्मेदारी निभाने की थी
परिवार और भविष्य को सुरक्षित करने की थी
तो निर्णय को
अपराध नहीं कहा जा सकता।
परिणाम
हमेशा नीयत के
हिसाब से नहीं आते।
जीवन
गणित नहीं है।
उदाहरण : महेश (उम्र 50) — बच्चों की पढ़ाई
महेश ने
बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए
लोन लिया।
बीच में
स्वास्थ्य बिगड़ा।
आय घटी।
आज लोग कहते हैं—
“इतनी पढ़ाई की ज़रूरत थी क्या?”
लेकिन उस समय
बच्चों की पढ़ाई में निवेश
एक नैतिक निर्णय था।
यह निर्णय
गलत नहीं था।
समय कठिन हो गया।
खुद को माफ़ करना क्यों ज़रूरी है
कर्ज से बाहर निकलने की प्रक्रिया
पैसे से नहीं,
माफ़ी से शुरू होती है।
खुद को माफ़ करना—
कि मैंने उस समय
जितना समझा,
उतना ही कर पाया
कि मेरे पास
भविष्य देखने की क्षमता नहीं थी
कि मैं इंसान हूँ,
मशीन नहीं
जब तक यह माफ़ी नहीं मिलती,
मन स्थिर नहीं होता।
निर्णयों को नए फ्रेम में देखना
पुराने निर्णयों को
इस सवाल से मत देखिए—
“मैंने क्या गलत किया?”
बल्कि इस सवाल से देखिए—
“मैंने उस समय
किन परिस्थितियों में
क्या चुना?”
यह दृष्टि
आत्म-दोष को
सीख में बदल देती है।
कर्ज की असली चेतावनी यहाँ है
कर्ज यह नहीं कहता—
“तुमने गलती की।”
कर्ज यह कहता है—
“अब हालात बदल गए हैं।
अब नए फैसलों की ज़रूरत है।”
पुराने फैसलों पर
खुद को सज़ा देना
इस चेतावनी को
अनसुना करना है।
यह भाग क्या सिखाता है
हर कर्ज गलत निर्णय का परिणाम नहीं
समय एक बड़ा कारक होता है
आत्म-दोष समाधान नहीं
सीख लेना शक्ति है
निष्कर्ष
गलत निर्णय
और गलत समय
दो अलग बातें हैं।
कर्ज के साथ
हम अक्सर
इन दोनों को
गड़बड़ा देते हैं।
जब आप यह समझ लेते हैं कि
आपका निर्णय
उस समय की समझ पर आधारित था,
और समय बदल गया—
तो आत्म-दोष
धीरे-धीरे
खत्म होने लगता है।
और वहीं से
नई समझ की शुरुआत होती है।
✦ आत्मचिंतन ✦
जहाँ आत्म-दोष से आगे बढ़कर
सीख को अपनाया जाता है।

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